कल तुम्हारा है
तुम गलत हो ये एक कहे तुम चुप रहो तो सब कहे पर बात सही ना तब लगे जब तुम कहो सब सही कहे। ये बात नही बस बात की ये बात है विश्वास की क्या तुम्हे है शक इस बात पे? क्यो तुम उन सब से घुले मिले। तुम साथ चलो तो साथी बने आगे चलो तो घमन्डी लगे गर रुक गये तो सब छोड चले पर बात सही न तब लगे जब साथ मे भी तुम अलग हुए। ये बात नही बस बात की ये बात है इन्साफ़ की क्या तुम भी ऎसा कर पाते? जो चीजे बस तुम सह चुके। ना बोले तो नासमझ बने बोले तो जबरदस्ती लगे पर बात सही न तब लगे जब अपने दुख मे तुम हस पडे। ये बात नही बस आप की ये बात है समाज की जो उनके सुख मे खुश रहे बस वही उनके दिल लगे। ना भूलो तुम इस बात को तम नही अङ्ग इस समाज के, ये समाज नही द्लदल है जिसे आता बस फ़साना है, निकाल सके तुम को जो बस वही तुम्हारा किनारा है, अपनी सोच से काम लो वही रस्सा तुम्हारा है, खडे उठो इस दलदल से क्योकि कल तुम्हारा है।